विद्युत लेपन क्या होता है ? इसकी विधि | उपयोग

विद्युत लेपन क्या होता है ? इसकी विधि | उपयोग

विद्युत लेपन क्या होता है ? इसकी विधि | उपयोग

विद्युत लेपन

हम इस टॉपिक में विद्युत लेपन के बारे में समझेंगे जिसमे हम देखेंगे की विद्युत लेपन क्या होता है और किस प्रकार यह विद्युत लेपन किया जाता है अर्थात इसकी विधि क्या होती है और किस प्रकार इसके अन्दर एनोड एवं कैथोड का उपयोग किया जाता है इनको किस प्रकार से लगाया जाता है और किस प्रकार के विलयन का उपयोग इसके लिए किया जाता है  और इसके बाद हम देखेंगे की विद्युत लेपन का क्या उपयोग होता है | इन सभी बातों को हम एक – एक करके समझेंगे तो पहले शुरू करते है विद्युत लेपन क्या होता है |

अगर सबसे सरल   भाषा में कहें तो विद्युत लेपन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमे एक धातु की परत को दूसरी धातु के ऊपर लेपित किया जाता है और इसके लिए विद्युत धारा का उपयोग किया जाता है इसीलिए इसे विद्युत लेपन कहा जाता है अर्थात यह एक ऐसी प्रक्रिया होती है जिसमे विद्युत अपघट्य पदार्थ होता है और इसके अन्दर एनोड एवं कैथोड पर धातुएं लगी रहती है और इस अपघट्य में जब विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है तो इसमें विद्युत अपघटन होता है और एक धातु की परत दूसरी धातु पर लेपित हो जाती है इसे ही विद्युत लेपन कहा जाता है |

जब एक धातु के ऊपर दूसरी धातु की परत को लेपित कर दिया जाता है तो इसके पीछे यह मकसद होता है की धातु को संक्षारण से बचाया जा सके तथा धातु को चमकीला और सुन्दर बनाया जा सके जिससे की वह लम्बे समय तक  जंग से मुक्त रहे और उस धातु की चमक भी लम्बे समय बनी रहे | लेकिन अब हम विद्युत लेपन की पूरी विधि को विस्तार से समझते है की आखिर किस प्रकार यह पूरी प्रक्रिया होती है |

विद्युत लेपन की विधि

इस विधि में एक इलेक्ट्रोप्लेटिंग Bath लिया जाता है जिसमे जिस धातु का लेपन करना है उसका योगिक भरा हुआ होता है तथा एक आधार धातु को लिया  जाता है और एक वह धातु ली जाती है जिस पर लेपन करना होता है अब इन धातुओं में से जिस पर लेपन करना होता है उस धातु को अच्छे से साफ कर लेतें  है जिससे की धातु पर किसी भी तरह की धूल कण , तैल या ग्रीस आदि न रहे | जिससे की विद्युत लेपन अच्छी तरह से हो जाए |

अब इसके बाद जिस धातु पर लेपन करना होता है उसे बैटरी के ऋणात्मक सिरे से जोड़ा जाता है  जिसे कैथोड भी कहा जाता है और जिस धातु का लेपन करना होता है उसे  धनात्मक सिरे से जोड़ दिया जाता है जिसे एनोड भी कहा जाता है  | और इन्हें बैटरी से कनेक्ट करके विद्युत अपघट्य से भरे  हुए Bath में इस प्रकार लटका दिया जाता है की ये किसी अन्य चीज को न छुए |

अब जब एक बार पूरा सेट बनकर तैयार हो जाता है तो दोनों टर्मिनल के बिच  में विद्युत धारा को प्रवाहित किया जाता है जिससे बर्तन में भरे हुए अपघट्य का विद्युत अपघटन होता है और आयन का स्थानांतरण शुरू हो जाता है जिससे की आयन एनोड यानि की ऋणात्मक सिरे से कैथोड यानी की धनात्मक सिरे की और प्रवाहित होंने  लगते है |

और इस प्रकार एक धातु की परत दूसरी धातु पर लेपित होना शुरू हो जाती है और इस प्रकार धीरे धीरे करके एनोड धातु की परत कैथोड धातु पर लेपित हो जाती है | इस प्रक्रिया को विद्युत लेपन कहा जाता है | इसके साथ ही कुछ कारक ऐसे भी होते है जो विद्युत लेपन की क्रिया को प्रभावित करते है तो अब हम ऐसे कारक के बारे में समझ लेते है |

विद्युत लेपन को प्रभावित करने वाले कारक

विद्युत लेपन को निम्न कारक प्रभावित करते है –

1 . इस लेपन के लिए उपयोग होने वाले विलयन में आयनों की मात्रा – अगर किसी धातु को ऐसे योगिक के विलयन में डाल दिया जाए जिसमे आयन प्रचुर मात्रा में हों तो पृथक्करण  की क्रिया होने लगती और फिर ऐसे लेपन टिकाऊ नहीं होते है |

2 . अगर लेपन करते समय धातु पर धूल या चिकनाई रह जाए तो ये भी इसे प्रभावित करती है |

3 . विद्युत धारा के मान में परिवर्तन भी इस लेपन विधि को  प्रभावित करता है |

4 . इस क्रिया में उपयोग होने वाले एनोड तथा कैथोड के बिच की दूरी भी इसे प्रभावित करती है |

विद्युत लेपन के उपयोग

इस लेपन का उपयोग निम्न जगहों पर किया जाता है –

1 . अगर किसी भी धातु को संक्षारण या जंग लगने से बचाना हो तो उस धातु के ऊपर किसी अन्य धातु की परत लेपित कर दी जाती है जिससे उस मुख्य धातु को जंग लगने से बचाया जा सकता है |

2 . इस विधि का उपयोग धातुओं को चमक को लम्बे समय तक बनाए रखने के लिए या फिर  धातुओं को सुन्दर और आकर्षक बनाने के लिए भी इसका उपयोग किया जाता है l

इस प्रकार विद्युत लेपन का उपयोग होता है |

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