सीबेक प्रभाव क्या है ? इसका उपयोग

सीबेक प्रभाव क्या है ? इसका उपयोग बताइये

सीबेक प्रभाव क्या है ? इसका उपयोग बताइये

सीबेक प्रभाव

आज के इस टॉपिक में हम एक ऐसे प्रभाव को समझेंगे जिसमे दो अलग –  अलग धातुओ के तारो को आपस में जोड़कर इन धातुओ  के तारो का उपयोग करके एक विद्युत परिपथ ( सर्किट )  बनाया जाता है और दोनों धातुओ के तारो  को अलग –  अलग तापमान पर रखा जाता है और  फिर इसका अध्ययन किया जाता है इसे ही सीबेक प्रभाव के नाम से जाना जाता है | लेकिन इसे किस तरह बनाया जाता है | और किस प्रकार धातुओ के तारो का उपयोग किया जाता है इन बातो को हम डिटेल में आज के टॉपिक में समझेंगे |

सन 1821 में जर्मन के एक वैज्ञानिक जिनका नाम थॉमस जॉनसन सीबेक था उन्होंने ही इस प्रभाव की खोज की थी | जिसमे उन्होंने बताया की जब दो अलग –  अलग धातुओ से बने तारो का उपयोग करके जिनमे से दोनों हो धातुओ से बने तारो को अलग –  अलग तापमान पर रखा जाता है अर्थात यदि एक को गर्म रखा जाता है तो दुसरे को ठंडा रखा जाता है | इस प्रकार से तारो को जब आपस में जोड़ा जाता है |

तब दो अलग –  अलग संधियाँ बनती है | तथा दोनों ही संधियों पर तापमान अलग –  अलग होता है | तब इन दोनों धातुओ से बने तारो के बिच विभवान्तर ( इलेक्ट्रो मोटिवे फोर्स ) EMF उत्पन्न हो जाता है | इस  उत्पन विभवान्तर की  तीव्रता निम्न बातो पर निर्भर करती है – 

1 . परिपथ में उपयोग किये जाने वाले धातु के तारो की प्रकृति  पर

2 . संधि के लिए उपयोग किये जाने वाले दोनों असमान धातुओ के तारो की दोनों संधियों के तापान्तर पर

3 . दोनों संधियों के ओसत तापमान पर

इस प्रकार उत्पन्न विभवान्तर का मान ज्यादा नहीं होता है | इसका मान संधियों पर उत्पन्न होने वाले तापमान के अंतर के मान का कुछ मिली वोल्ट या माइक्रो वोल्ट के बराबर ही होता है | अगर यहा  उत्पन्न होने वाले तापमान के अंतर का मान अगर ज्यादा होता है तो कुछ डिवाइस इसमें लगे होते है जो की कुछ मिली वोल्ट का विभवान्तर जनरेट कर सकते  है |

तब इस कंडीशन में बहुत सारे डिवाइस को सीरिज में लगाया जा सकता है जिससे की ज्यादा मात्रा में आउटपुट वोल्टेज के मान को प्राप्त किया जा सके | या फिर कुछ डिवाइस को पैरेलल में भी लगाया जा सकता है जिससे की ज्यादा मात्रा में करंट के मान को भी प्राप्त किया जा सकता है |

इस प्रकार अगर यदि संधियों पर ज्यादा मात्रा  में तापमान के अंतर को नियंत्रित किया जाए तो इस प्रकार के डिवाइस का ज्यादा मात्र में उपयोग करके आउटपुट इलेक्ट्रिक पॉवर को प्राप्त किया जा सकता है |

अब उत्पन्न होने वाले इस विद्युत वाहक बल या विभवान्तर को मापने के लिए असमान धातुओ के तारो के ठंडे सिरे को विभवमापी या फिर किसी अन्य उपकरण से जोड़ दिए जाते है | अब यदि इस परिपथ में किसी दूसरी धातु का तार श्रेणी क्रम में लगा दिया जाए तब ताप विद्युत प्रभावों में कोई परिवर्तन नहीं होता है |

अब यदि इस सीबेक विद्युत् वाहक बल का परिमाण E हो तथा ठंडी संधि का तापमान में अंतर T हो और यदि एक संधि का तापमान शून्य डिग्री पर रखा जाए तब विद्युत वाहक बल ( विभवान्तर ) और तापमान T में सम्बन्ध कुछ इस प्रकार होगा –  

E = A T + B T2

जहा A तथा B ताप विद्युत स्थिरांक है तथा इनका मान परिपथ में उपयोग की जाने वाली धातुओ के मान पर निर्भर करता है |

अब हम यह समझेंगे की आखिर यह वोल्टेज या विभवान्तर या फिर इसे इलेक्ट्रो मोटिव फोर्स या EMF के नाम से भी जाना जाता है | इसकी उत्पत्ति किस प्रकार होती है |

EMF का उत्पन्न होना

अब हम सीबेक प्रभाव के दोरान उत्त्पन्न होंने वाले विभवान्तर के बारे में समझेंगे | इसके लिए हम जानते है की जब दो धातुओ को एक दुसरे के संपर्क में लाया जाता है तो इन धातुओ में उपस्थित इलेक्ट्रान का यह गुण होता है की ये ज्यादा इलेक्ट्रान डेंसिटी वाली धातु में से कम इलेक्ट्रान डेंसिटी वाली धातु की और प्रवाहित होते है |

ऐसा इसलिए होता है क्यूंकि इलेक्ट्रान का यह गुण होता है की एक समान तापमान पर यदि दो अलग –  अलग धातुओ में इलेक्ट्रान डेंसिटी अलग –  अलग है तो ये एक धातु से दूसरी धातु की और गति कर सकते है | इस प्रकार दोनों धातुओ के बिच एक इलेक्ट्रो स्थैतिक फील्ड जनरेट हो जाता है | जिसके कारण पोटेंशल डिफरेंस उत्पन्न हो जाता है |

तब इस प्रकार दोनों धातुओ के बिच थर्मो करंट उत्पन्न हो जाता है |

अब हम समझते है की सीबेक प्रभाव में सीबेक नियतांक क्या होता है |

 सीबेक नियतांक

अगर हम सीबेक प्रभाव के लिए सीबेक नियतांक की बात करे तो उसकी परिभाषा इस प्रकार होती है की किसी कंडक्टर में किन्ही भी दो बिन्दुओ के बिच उत्पन्न होने वाला  वोल्टेज जबकि इन दोनों बिन्दुओ के बिच तापमान में अंतर को एक समान रूप से 1 डिग्री केल्विन पर रखा जाता है तो इसे सीबेक नियतांक के नाम से जाना जाता है |

अगर हम इसका एक उदाहरण देंखे तो कोपर Constantan एक प्रकार का कॉम्बिनेशन है जिसका सीबेक नियतांक का मान कमरे के तापमान पर  41 माइक्रो वोल्ट पर केल्विन होता है |

 सीबेक प्रभाव के उपयोग

इस प्रभाव का उपयोग बहुत जगहों पर किया जाता है लेकिन हम यहाँ  इस प्रभाव के कुछ उपयोग के बारे में समझते है जैसे की इसका उपयोग – 

1 . सीबेक प्रभाव का उपयोग अच्छी सेंसिटिविटी तथा एक्यूरेसी के साथ तापमान को मापने में किया जाता है |

2 . सीबेक प्रभाव का उपयोग थर्मो कपल डिवाइस में भी किया जाता है जिसका उपयोग तापमान के अंतर को मापने के लिए किया जाता है |

3 . सीबेक प्रभाव का उपयोग कई तरह के पावर प्लांट में भी किया जाता है जहा पर इस प्रभाव का उपयोग करके हीट के रूप में Waste होने वाली एनर्जी को वापस काम में लिया जाता है |

4 . सीबेक प्रभाव का उपयोग कई प्रकार के हीट इंजन में भी किया जाता है |

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